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पर्यावरण प्रेमी ने जिंदगी के 33 साल खपाकर खड़ा कर दिया जंगल….

उत्तरकाशी: आपने यह तो सुना ही होगा कि हमें प्रकृति का सम्मान करना चाहिए, उसके साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। क्योंकि प्रकृति जब अपना रौद्र रूप धारण करती है तो सब कुछ तबाह कर देती है। ऐसा हम केदारनाथ और हाल ही में जोशीमठ आपदा में देख चुके है। पर्यावरण का सम्मान कैसे करें इसकी इसका उदाहरण उत्तराखण्ड में देखने को मिला है।

इन्होंने वरूणावत पर्वत के भू-धंसाव वाले क्षेत्र में विभिन्न प्रजाति के 5 लाख पौधों का रोपण करके मिसाल कायम की है। आज इन पौधों ने वृक्षों का रूप ले लिया है, जो एक घने वन के रूप में विकसित हो रहे हैं। इन्होंने अपने निजी प्रयास से बगैर किसी सरकारी सहायता के 45 हेक्टेयर वन तैयार किया है। मन मे पर्यावरण के प्रति अथक प्रेम के कारण इन्होंने अपने जीवन के 33 वर्ष प्रकृति संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित किए हैं। प्रताप पोखरियाल ने असम्भव जैसे कार्य को सम्भव करके एक मिसाल कायम की है।

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पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वालों लोगों के लिए प्रताप पोखरियाल प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं। इस कारण यहां पर कई आवासीय भवन और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को क्षति पहुंची थी। स्थानीय लोग यहां से पलायन करने को मजबूर हो गए थे। प्रताप पोखरियाल ने उस समय ही संकल्प लिया था कि वरूणावत पर्वत के भूस्खलन को रोकना है। इसलिए वे 2003 से लगातार स्वयं के संसाधनों से वरूणावत पर्वत की तलहटी पर पौधारोपण और पौधों की देखरेख कर रहे हैं।

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